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सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

एक गरीब महिला YouTuber की कहानी : A Story of Poor Ladies YouTuber

 पूरी रात बर्फबारी से ढ़की एक छतरे के नीचे सोने के बावजूद, पूजा अपने छोटे से परिवार के लिए रोजगार के लिए अपनी जिंदगी की मुश्किल से लड़ रही थी। उसके पति कामगार थे, जो एक कुर्सी निर्माण कंपनी में काम करते थे। उनकी मेहनत और ईमानदारी के बावजूद, उनकी कमाई बस इतनी थी कि घर का चलन हो सकता था, लेकिन अच्छी जीवनशैली जीने के लिए बहुत कुछ कम था।


पूजा का सपना था कि उसके बच्चों को बेहतर भविष्य मिले, लेकिन वह जानती थी कि उसके पति की आय इसे कभी संभाल नहीं सकती। एक दिन, उसे इंटरनेट के एक नए दुनिया के बारे में पता चला - घर बैठे मोबाइल से काम करने का एक ऑनलाइन अवसर। इसे सुनकर, उसने तय किया कि वह इसका उपयोग करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करेगी।



पूजा ने अपने जीवन की कहानी को लोगों के साथ साझा करने का निर्णय लिया, और उसने एक YouTube चैनल बनाया। उसने वहां अपने दिनचर्या, अपनी संघर्षों और अपने सपनों को दर्शाने के लिए Videos बनाना शुरू किया। शुरुआत में, उसका चैनल कुछ ही लोगों तक पहुँच पा रहा था, लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी।


उसके Videos में आने वाले कुछ ही महीनों में, एक कंपनी ने उसके चैनल को मोनेटाइज करने के लिए एक सहायता प्रदान की। अब उसकी मेहनत और विनम्रता ने उसे उसकी मेहनत का फल देना शुरू किया। उसके चैनल ने दिन पर दिन बढ़ती हुई पहचान बनाई और उसने अच्छी कमाई शुरू की।


पूजा के चैनल की लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी और उसकी कमाई भी बढ़ रही थी। उसने अपने परिवार के साथ मिलकर कई समस्याओं का सामना किया, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। उसने अपनी विडियोज के माध्यम से लोगों को मोटीवेट किया, उन्हें आत्म-विश्वास दिया और उन्हें यह सिखाया कि हालात चाहे जैसे भी हों, मेहनत और संघर्ष से आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।


उसके Videos ने एक दिन ऐसा आया कि उसके चैनल की सदस्यता बढ़ रही थी और उसकी कमाई भी बढ़ रही थी। उसने अपने परिवार को समर्थन करने के लिए उसके फ्री समय का इस्तेमाल करना शुरू किया और उसने अपने चैनल को और भी अच्छा बनाने के लिए अधिक प्रयास किया।


उसने नए विषयों पर वीडियो बनाना शुरू किया, और उसने अपने दर्शकों को उपयोगी टिप्स और योजनाएं देना शुरू किया। उसने अपने चैनल को एक साकारात्मक स्थान पर पहुँचाया और उसने अपने जीवन के संघर्षों को एक प्रेरणादायक संदेश में बदल दिया।


धीरे-धीरे, पूजा का चैनल और भी बड़ा हुआ, और उसने अच्छी कमाई की। अब उसके परिवार को खाने-पीने, कपड़े और शिक्षा की छोटी-मोटी आवश्यकताएं पूरी करने के लिए पैसे थे। पूजा ने अपनी मेहनत और संघर्ष के माध्यम से अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करना शुरू किया और समृद्धि की ओर बढ़ने में सफल रही।


उसकी कहानी ने बताया कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को छोटे शुरुआती आवसरों का सही रूप से उपयोग करना चाहिए। वह नहीं सिर्फ अपने परिवार को सुखी बना रही थी, बल्कि उसने अपने दर्शकों को भी सही मार्गदर्शन दिया और उन्हें यह बताया कि हालात जैसे भी हों, मेहनत और आत्म-समर्पण से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।

मंगलवार, 30 जनवरी 2024

संघर्ष से सफलता की ओर: एक गरीब आदमी की Successful Forever Business Owner बनने की कहानी

 राजू, एक गरीब और ईमानदार आदमी थे जो अखबार बेचकर अपने बच्चों को जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास कर रहे थे। वह अपने छोटे से खुद के धंधे से नौकरी कर रहे थे, लेकिन उनकी कमाई से वह अपने परिवार को सुरक्षित नहीं रख पा रहे थे। उनका जीवन सामान्य और सीमित था, जिसमें सिर्फ बुढ़़ापे तक ही संतुलन बना रहता था।


एक दिन, राजू की ज़िन्दगी में एक मोड़ आया जब एक Forever Living Products के नेटवर्कर ने उनसे मिलने का मौका पाया। वह राजू को बताने लगे कि फॉरएवर बिजनेस का एक सुनहरा अवसर है और कैसे यह लोगों को स्वतंत्र और सफल बनाने का मार्ग दिखा सकता है। राजू ने इसे सुनकर अच्छा लगा और उसने इस नए अवसर को समझने के लिए प्रस्तुतिकरण देखने का निर्णय किया।



राजू ने कई सेमिनार्स और ट्रेनिंग सत्रों में भाग लेने का निर्णय किया, जिससे उसने फॉरएवर बिजनेस को समझना शुरू किया। उसने अपने जीवन को बदलने के लिए काम करने का संकल्प किया और नए यात्रा की शुरुआत की। पहले कुछ सालों में, उसने कई सीखें और कई बार असफलता का सामना किया, लेकिन उसने हार नहीं मानी और आगे बढ़ने का प्रयास किया।


राजू ने अपने जीवन में कई बदलाव किए और फॉरएवर बिजनेस में मैनेजर के पद को हासिल किया। उसने मेहनत और समर्पण के साथ अपनी टीम को बढ़ावा दिया और उसका संगठनिक स्तर बढ़ाते हुए उसने अब लाखों रुपए की कमाई करना शुरू किया।


राजू का यह सफलता का सफर उसकी लगन, समर्पण और अद्वितीयता की ओर एक कदम बढ़ने का प्रतीक है। उसने किसी भी स्थिति में हार नहीं मानी और सीखते रहने का मनोबल बनाए रखा। उसने अपने आत्मविश्वास को बढ़ाया और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास किया।


फॉरएवर बिजनेस ने राजू को एक नई दिशा दिखाई और उसके जीवन को सजीवनी दी। उसने अपने परिवार के साथ एक बेहतर और सुखमय जीवन का आनंद लेना शुरू किया। उसकी आर्थिक स्थिति में सुधार और स्थिरता ने उसे और उसके परिवार को आत्मनिर्भर बनाया।


इस सफलता की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि कभी भी, किसी भी स्थिति में, मेहनत, समर्पण, और स्वयं पर विश्वास बना रखना कितना महत्वपूर्ण है। राजू ने अपने सपनों की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयास किया और उसने अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ दिया। उसकी कड़ी मेहनत, उत्साह, और आत्मविश्वास ने उसे उसके लक्ष्यों तक पहुंचाया और उसे एक सफल व्यक्ति बना दिया।


अगर हम अपने सपनों की प्राप्ति के लिए सही दिशा में कदम बढ़ाते हैं और हार नहीं मानते, तो किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं और अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। राजू की तरह, हमें भी अपने जीवन में उच्चता की ओर बढ़ने के लिए मेहनत और समर्पण के साथ काम करना चाहिए ताकि हम अपने सपनों को हकीकत में बदल सकें।

शनिवार, 20 जनवरी 2024

डिजिटल युग में मेहनत से सफलता की कहानी | Story of Success in Digital Era

पाँच सालों तक जिंदगी ने एक श्रमिक के रूप में बिताए थे। राज, एक आम श्रमिक, हर दिन अपनी कठिनाइयों का सामना करता और मेहनत करके अपने परिवार का पेट भरता था। लेकिन एक दिन उसकी जिंदगी में एक बड़ा पल आया जो उसे सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाने का मौका देने वाला था।




एक दिन राज, अपने दोस्त के साथ बातचीत कर रहा था। उसका दोस्त एक डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट था और उसने राज को डिजिटल मार्केटिंग और यूट्यूब के क्षेत्र में काम करने के फायदे के बारे में बताया। इससे राज की दुनिया में एक नया दृष्टिकोण आया और उसने तय किया कि वह भी डिजिटल मार्केटिंग में कदम से कदम मिलाकर चलेगा।

राज ने यूट्यूब के बारे में और डिजिटल मार्केटिंग के तरीकों को सीखना शुरू किया। शुरूवात में, उसने अपने दिनचर्या को समझाने और शीखने के लिए समय निकाला। उसने यूट्यूब चैनल बनाना और विभिन्न विषयों पर वीडियो बनाना शुरू किया।

महीनों की मेहनत और उनके संघर्षों के बाद, एक दिन राज का एक वीडियो वायरल हो गया। लोगों ने उसकी स्वभावपूर्ण शैली को पसंद किया और उसके चैनल को सब्सक्राइब करना शुरू किया। उस दिन से उसका चैनल मॉनेटाइज हो गया और उसे लाखों रुपये हर महीने कमाई करने का मौका मिला।

राज ने अपने सफलता को सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों की मदद के लिए भी इस्तेमाल किया। उसने गरीबों और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का निर्णय लिया और अपनी कमाई का एक हिस्सा उनके लिए अलग रखा।

धीरे-धीरे, राज की जिंदगी में और भी बदलाव हुआ। एक सुंदर सी लड़की उसकी जीवनसाथी बन गई, जो भी उसके साथ उसके यूट्यूब चैनल को संचालन में मदद करने लगी। उनका परिवार अब खुशियों और सफलता के साथ भरा हुआ है।

राज की कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि जीवन में मेहनत और सही दिशा में मेहनत करने का महत्व है। कभी भी हालातों के खिलाफ हार नहीं मानना चाहिए और नए अवसरों को पहचानने के लिए तैयार रहना चाहिए। राज ने अपनी अद्वितीयता और मेहनत से सबको प्रेरित किया और उसने अपनी सफलता को दूसरों के साथ साझा करने का निर्णय लिया, जिससे उसका जीवन और भी सफल बन गया।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2023

भिखारी से व्यापारी तक: सफलता की कहानी | Motivational Story

 बहुत समय पहले, उम्मीदविले शहर में एक आदमी था जिसका नाम राज था। राज ने जीवन की कठिनाईयों को बहुत छोटी आयु से देखा था। गरीबी में पैदा होने के कारण, उसने अपने प्रारंभिक वर्षों को भीख मांगते हुए गुजारे, उसके टूटे फटे कपड़े सिर्फ मौसम से उसे बचाते थे। फिर भी, अपनी कठिनाइयों के बावजूद, राज ने अपने दिल में एक सपना जी रखा था—एक जीवन का सपना जिसमें कुशलता और सफलता हो।



एक ठंडी शाम को, जब राज एक सड़क के कोने पर बैठा हुआ था, उसने देखा कि एक इमारत के चारों ओर लोग एकत्र हो रहे थे। जिज्ञासा ने उसे बेहतर निर्णय लेने पर मजबूर किया, और वह देखने के लिए चला कि यह कौन सी खलबली है। यह एक उद्यमिता पर्वाह था, जिसे सफल व्यापारमान शाहकार मिस्टर कपूर द्वारा संचालित किया जा रहा था। राज ने मिस्टर कपूर के शब्दों को ध्यान से सुनते हुए एक आत्म-विश्वास की किरण को जगाया—आशा और संकल्प की एक आशा।


जो कठिनाइयों के बावजूद, राज ने अपने भविष्य को बदलने का निर्णय लिया। उसने हर पैसे को बचाने का निर्णय किया जो उसको अनजान लोगों की दया से मिलते थे, ताकि एक छोटे से व्यापार शुरू करने के लिए पर्याप्त पैसा इकट्ठा हो सके। दिन-ब-दिन, उसने इस पर लगातार काम किया, जब दुनिया उसके खिलाफ साजिश कर रही थी।


एक दिन, राज ने एक दयालु महिला से मिली, जिनका नाम मीरा था, जो एक छोटे से चाय की दुकान मालिक थी। मीरा राज के अथक संघर्ष को देखकर प्रभावित हुई और उसको नौकरी देने का निर्णय लिया। राज ने इस अवसर को पकड़ लिया, ईमानदारी से काम करते हुए और जो कुछ भी कमाते हुए हर पैसे को बचाते हुए।


समय के साथ, राज की बचत बढ़ी और उसने अपनी व्यापार और वित्त की ज्ञान को बढ़ाने के लिए सायंकाल के कक्षाओं में दाखिला किया। उसकी संघर्षशीलता ने स्थानीय व्यापारी, मिस्टर सिंह, की नजर खींची, जो ने उसे मेंटर बनने का निर्णय किया। मिस्टर सिंह के मार्गदर्शन में, राज ने व्यापार की जटिलताओं को सीखा, बजटिंग से लेकर मार्केटिंग तक।


ज्ञान और अनुभव से युक्त होकर, राज ने एक साहसिक कदम उठाया। उसने अपनी बचत का उपयोग करके एक छोटे से क्षेत्र में एक किराना की दुकान शुरू की। वह दुकान एक आशा का प्रतीक बन गई, जो सस्ती में उत्कृष्ट उत्पादों की पेशेवरता प्रदान कर रही थी। राज का सच्चा रूप और उसके ग्राहकों के प्रति समर्पण ने उनके विश्वास और निष्ठा को जीता।


वर्षों बीतने पर, राज का किराना स्टोर सफलता की ओर बढ़ा और एक सफल व्यापार के लिए एक श्रृंगार बन गया। उसने विभिन्न क्षेत्रों में विस्तार किया, खुदाई से लेकर असली एस्टेट तक। उसकी कहानी बहुतों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गई, जबकि उसने कभी नहीं भूला कि उसकी शुरुआत कितनी कमजोर थी, और उसने अपनी सफलता का उपयोग उन लोगों की सहायता करने के लिए किया जो जरूरतमंद थे।


अंत में, राज का सफलता के सफर ने सबको सिखाया कि सहनशीलता, संघर्षशीलता, और इच्छा की शक्ति ही वह मूल हैं जिनसे हम अपनी किसी भी शुरुआत को पार कर सकते हैं और एक उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं। राज ने वहाँ से शुरूआत की नहीं बल्कि उसे पार करने की इच्छा की मजबूती की महत्वपूर्णता को साबित करने वाला साकार आदान-प्रदान किया।

शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

जिंदगी की हर चीज अनमोल है

यह कहानी है एक ऐसे आदमी की जो एक प्राइवेट कंपनी में काम किया करता था। कंपनी के काम के लोड की वजह से वह बहुत ही परेशान रहा करता था। उसे अपने मालिक  की डांट  सुनने को भी मिलता था।
वही जो गुस्सा था कंपनी का अपने घर आकर के लड़को और पत्नी पे निकालता था।  रोज अपने घर में झगड़ा करता था। उसे लग रहा था कि उसकी जिंदगी का होना न होना बराबर है।
जब उसके दोस्तो का फोन आता था, तो फोन कट कर देता था। जब रिश्तेदारों का फोन आता था तो गुस्सा करने लगता था।  


एक दिन की बात है कि ये अपने घर में बैठा हुआ था।
उसका लड़का इसके पास आया और आकर के बोला कि पापा मेरी कुछ मदद कर दीजिये। मुझे होम वर्क करवा दीजिये । इसपर वह गुस्सा हो गया और अपने लड़के को डाट कर के भगा दिया और बोला जाओ यहाँ से मैं होम वर्क कराने के लिए बैठा हु यहाँ पे। 
कुछ देर के बाद जब इसका गुस्सा शांत हुआ तो इसको लगा की जाकर के एक बार लडको की मदद करनी चाहिए। उसका होम वर्क करवाना चाहिए तो ये अपने लड़के के कमरे में गया तो देखा की वह लड़का सो चूका था।
उसके लड़के ने होम वर्क की कॉपी उसने अपने  सर पे रखा था। होम वर्क करते - करते ही वह सो गया था। इसने कॉपी उठाया और इसको लगा की इस कॉपी को निचे रख देतें है ताकि लड़का आराम से सो सके लेकिन जैसे ही ये कॉपी निचे रखने वाला था।
इसने सोचा कि इसमें लिखा क्या हुआ है इसको एक बार पढ़ लेते हैं । लड़का कर क्या कर रहा था जिसमे इसको मदद चाहिए थी। होम वर्क में लिखा था “वो काम जो पहले हमे अच्छे नहीं लगते थे लेकिन बाद में धीरे धीरे अच्छे लगने लगतें हैं”। इसके विषय पे लड़के को एक कहानी  लिखना  था । उसके लड़के ने एक पेज लिख दिया था तो इसने पढ़ना शुरू किया लड़के ने सबसे पहले लिखा हुआ था।
थैंक यू सो मच फाइनल एग्जाम जो पहले हमें बुरे लगते है लेकिन फाइनल एग्जाम के वजह से बाद में गर्मियों की छुटियाँ मिल जाती हैं, थैंक यू सो मच उन बेस्वाद लगने  वाली दवाइयों का जो पहले तो बिलकुल अच्छी नहीं लगती है लेकिन बाद में उसी दवा की वजह से हम सब ठीक हो जातें हैं।
फिर उस  लड़के ने आगे लिखा था  थैंक यू  सो मच  उस अलार्म घड़ी का जो सुबह सुबह हमें जगा देती है हमें अच्छा नहीं लगता है लेकिन उस घड़ी की वजह से जब हम जाग जाते है तो हमें पता चलता है की हम जिन्दा है,
थैंक यू सो मच ऊपर वाले का भगवन को उस लड़के ने धन्यावद कहा की आपकी वजह से मेरे पापा मेरी जिंदगी में आएं , मेरे पापा पहले तो मुझे डाटते है मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता है लेकिन बाद में  मुझे बाहर घूमाने के लिए ले जातें हैं।
अच्छा अच्छा खाना खिलातें हैं । खिलोने खरीदते हैं । लड़के ने भगवान को धन्यवाद किया । आपने मेरे पापा को मेरी लाइफ में भेजा क्योंकि मेरे एक दोस्त तो पापा ही नहीं हैं। 
ये जो आखरी की लाइन थी इस लाइन ने इस आदमी को झंझोर दिया अंदर तक हिला कर के रख दिया ये नींद से जग गया और इसको लगा की इसकी लाइफ में क्या कुछ है जो ये होते हुए भी मिस कर रहा है।
उस लड़के के कहानी को कॉपी करते हुए ये रोने लगा और बोलने लगा हे ऊपर वाले थैंक यू सो मच आपकी वजह से मेरे पास में घर है किसी के पास तो घर भी नहीं है क्या हुआ अगर मैं लोन चूका रहा हूँ।
तो इसके बाद उसने बोला थैंक यू  सो मच ऊपर वाले आपकी वजह से मेरे पास परिवार है । किसी  के पास तो परिवार भी नहीं होता है वो दुनिया में अकेले होतें हैं।
इस आदमी ने बोला थैंक यू सो मच ऊपर वाले आपकी वजह से मेरे पास कंपनी का जॉब है, किसी के पास तो जॉब होती ही नहीं हैं। हे ऊपर वाले थैंक यू सो मच इस लाइफ के  लिए जो आपने मुझे दी।  
इस कहानी से हमें यह सिख लेने की जरुरत है कि हमें जिंदगी में जो मिला है उसमे खुशियां ढूंढिए। परमात्मा द्वारा मिले हर चीज के लिए धन्यवाद कहना चाहिए। जिंदगी की हर चीज अनमोल है।

बुधवार, 5 जनवरी 2022

सपने सच होते है

दिल्ली में एक 12 वर्ष का लड़का था । उसका सपना था कि वह क्रिकेटर बनेगा । उसने अपने माता पिता से जाकर के बोला कि देखना एक दिन मैं दिल्ली का नंबर वन ओपनिंग बल्लेबाज बनूंगा क्योंकि यह उसे ओपनिंग बल्लेबाजी करना बहुत पसंद था।
उस लड़के ने अपने गार्जीयन को बताया । गार्जियन ने उस पे बहुत भरोसा कर उसके लिए कोचिंग लगवा दी तो वो क्रिकेट के ग्राउंड में जाने लगा। उसने कोच साहब से मिलने लगा कोच को बोलने लगा देखना सर एक दिन मैं दिल्ली  का बहुत बड़ा ओपनिंग क्रिक्केटर बनूँगा । 


हमारे यहाँ का बहुत बडा क्रिकेट क्लब है। दिल्ली क्रिकेट क्लब से ओपनिंग बलेबाजी करेगा तो कोच ने देखा कि उसका जो स्टूडेंट खेलने के लिए आया है। सिखने के लिए आया है। उसके आँखों में चमक है। खेलने का जूनून है। उसका सपना है। तो कोच ने भी पूरी ईमानदारी और लगन के साथ उसको क्रिकेट सिखाया और उसको तैयार किया। वो 12 वर्ष का लड़का कब 20 वर्ष का हो गया पता ही नहीं चला और इन 8 सालो में इसने कमाल की क्रिकेट खेली कमाल की गेम्स खेलें । एक ऐसा दिन आने वाला था कि दिल्ली क्रिकेट क्लब वाले उसे अपने टीम में शामिल  करने वाले थे ।
लेकिन उस दिन के आने से पहले ही एक दिन शाम में वह अपने मित्रो के साथ बाइक पर घूम रहा था। तभी उसकी बाइक का एक्सीडेंट हो गया। इतना भयानक हादसा हुआ की लड़का हॉस्पिटल पहुंच गया और फिर डॉक्टर ने इसके माता पिता को बताया की आपके बच्चे के कमर के निचे के हिसे का हड्डी टूट चूका है। और आपका बच्चा अब कभी भी चल फिर नहीं पाएगा। क्रिकेट खेलना तो बहुत दूर की बात है। क्रिकेट खेलना अब इसका सपना हो गया। इस बच्चे के माता पिता के आखों में आँसू आ गया इन्हे समझ में नहीं आ रहा था कि उनके बच्चे का इतना बड़ा सपना टूट गया था। 
उन्होंने जा कर के अपने बच्चे से बात की उसे बहुत समझाया की बेटा अब आपके आने वाली जिंदगी बड़ी मुश्किल होने वाली है।  इस लड़के को जब मालूम चला कि अब मै कभी चल फिर नहीं पाउँगा तो ये बहुत रोया इसके लिए इसके सारे सपने टूट गए थे बहुत उदास  था।
इसको समझ में नहीं आ रहा था कि क्या होगा । आगे 15  महीने तक ये लड़का हॉस्पिटल में था। आप सोचिये कि जो लड़का 15  महीने हॉस्पिटल में रहेगा तो उसके दिमाग में क्या क्या चलता होगा कितने सारे गलत विचार आएँगे। इस लड़के के साथ भी यही हो रहा था।
फिर भी इसने कभी हार नहीं मानी इसे लग रहा था कि मै एक दिन अपने ज़िदगी में कुछ अच्छा काम करुगा तो इस लड़के ने अपना दिमाग लगाया की क्यों ना मै यही से कुछ करू जो उसको समय इसे हॉस्पिटल में मिला था उसका सही से उपयोग करना शुर किया।
गजल लिखना शुरू किया, कविताएं लिखना शुरू किया, गाना लिखना शुरु किया। इसे लिखने का बहुत शौख था  लिखता चला गया।  धुन बनता चला गया उन्हें  गुनगुनाने लगा। 
इसका जो दिमाग था वो क्रिकेट से हट कर के म्यूजिक की तरफ आने लगा इसे लगने लगा कि इसे अब म्यूजिक में कुछ करना है आप सोचिये वो लड़का जो अभी हॉस्पिटल में है वो अब नया सपना देख रहा है आपको यकीन नहीं होगा  4  साल के बाद  इसका  एक गाना आता है जो की बहुत पॉपुलर हो जाता है।
वो गाना है लाइफ गोज ऑन दी सेम और ये लड़का दिल्ली का बहुत बड़ा पॉपुलर सिंगर बन जाता है इनका नाम है सनी। इनकी सच्ची कहानी मैं आपके साथ शेयर की है।
इनकी अब तक 50 करोड़ से ज्यादा एल्बम बिक चुके है। कई भाषाओँ में गाने गाए हैं और ये हमें बताते है कि अगर लाइफ में एक सपना टूट जाता है , तो  सनी से सीखिए नया सपना देखना शुरू कीजिये और उस नए सपने के लिए मेहनत करना शुरू कीजिये।
हम अनेक प्रतिभाओं के साथ जन्म लेते है लेकिन जिस प्रतिभा के साथ हम अपने तन-मन लगा कर करना शुरू करते है उसमे हमें सफलता जरुर मिलता है।

सोमवार, 3 जनवरी 2022

लक्ष्य तो होना ही चाहिए

 यह कहानी है एक ऐसे सरकारी कर्मचारी की जो हर रोज बस से सफर किया करते थे और अपने दफ्तर में आते थे और उसी बस से वह अपने घर जाते थे और बस की सफर से उनको कुछ न कुछ  सीख मिलता था।

वह अपने घर जा कर के एक डायरी में लिखते थे कि आज मैंने बस की सफर में क्या सीखा? रोजाना का ये उनका रूटीन था।



एक दिन वो अपने ऑफिस के लिए निकले और बस में जा कर के बैठे। बस चल दी उनके ठीक सामने वाली सीट पे एक लेडिस फैमिली बैठी हुई थी और उनके कुछ छोटे - छोटे बच्चे थे खूब हस रहे थे बाते वाते चल रही थी, तभी वहा से एक ठण्डा पानी बेचने वाला व्यक्ति निकल रहा था। वह व्यक्ति ज़ोर ज़ोर से आवाजे दे रहा था। 


इनके सामने वाली सीट पे जो लेडिस फॅमिली बैठी हुई थी। उसमे एक भाई साहब भी थे उन्होंने पूछा की ठण्डा पानी की बोतल कितने का है तो उस व्यक्ति ने बोला सर 30  रूपया  की बोतल है तो इन्होने बोला की ये 20 रूपया  की बोतल दो। ये 30 रूपया  में क्या बेच रहे हो? 20 रूपया में दो।


तो बताओ वो जो व्यक्ति ठण्डा पानी बेच रहा था । वो सिर्फ धीरे से मुस्कुराया कुछ नहीं बोला चुप चाप आगे बढ़ गया। 


ये जो भाई साहब सामने की सीट पे बैठे हुए थे। जो कि रोजाना लिखते थे कि आज  क्या सीखा इनको लगा अंदर से  खुशी हुई ? ये फटा फट उस व्यक्ति के पीछे गए कि ये आज मुझे कुछ आच्छा सा सिख दे देगा की क्या करना चाहिए अपने लाइफ में वो उस व्यक्ति के पीछे पीछे जाने लगे वो व्यक्ति इस सिट से कुछ दूर आगे बढ़ चूका था वह पानी बेच रहा था उन्होंने उसे जा कर के रोका और पूछा भाई साहब एक बात बताओ मैं  तुमसे कुछ पूछना चाह  रहा हु तुम अभी मेरे सिट के पास में थे वहा पे एक लडिस फॅमिली थी।


याद आया वो तुमसे बोल रहा था की 20 रूपया  की बोतल दो 30 रूपया  में क्यों दे रहे हो आपने कुछ नहीं  बोला उसे आप चुप चाप आगे बढ़ गए ऐसा क्यों आपको गुसा नहीं आया की कहा 10 – 5  रूपये के लिए कितना ज़िद कर रहा है।


एक गरीब व्यक्ति  से आप कुछ तो बोलते फिर उस व्यक्ति ने बोला वो जो भाई साहब बैठे हुए थे।


उनको मेरा पानी लेना ही नहीं था उनको प्यास ही नहीं लगी थी तो ये जो सरकारी कर्मचारी था, जो रोज डायरी में लिखता था उसने पूछा अरे आपको कैसे पता चल गया की उनको पानी का बोतल नहीं लेना था।


आप क्या भगवान हो आपको पता चल गया की उन्हें पानी नहीं लेनी है हो सकता है की उनको लेना होता, तो फिर से व्यक्ति ने बोला  उन्हें पानी नहीं लेना था जिसको पानी की जरुरत होती है वो पहले  पानी की बोतल लेता है फिर उसको पिता  है  उसके बाद में दाम  पूछता है  और पैसे दे देता है वो फालतू की बहस नहीं करता है। 


उस व्यक्ति ने जब ये  जवाब दिया तो उन्होंने उसे सुना और अपने घर जा कर के दायरी में इन्होने बहुत कुछ लिख डाला इन्होने लिखा ज़िन्दगी में अगर हमने लक्ष्य बना लिया है अगर हमारे  दिमाग में बात  फिक्स है, तो हम बेकार के  विवाद में नहीं पड़ेगे लेकिन हमारा लक्ष्य फिक्स नहीं है अगर हमें पता ही नहीं है कि हमें क्या करना है?


तो हम बहुत सारी कमिया उस लक्ष्य में ज़िन्दगी के लक्ष्य में भी निकालते रहेंगे और बस इसी चकर में समय खत्म कर देंगे।  खास कर के जो  भी लड़के इस कहानी को बढ़ रहें है।


मैं उनको बोलना चाहता हु की वह अपने  लक्ष्य को फिक्स कीजिये क्योंकी अगर आपके दिमाग में फिक्स नहीं होगा की आपको क्या करना है, तो आप उलझ कर के रह जाएंगे  साल पर साल निकलते चले जाएंगे और उसके बाद में आपको महसूस होगा की क्या टाइम तो तब था।


तब तो कुछ क्या ही नहीं लाइफ में अपने लक्ष्य को फिक्स कीजिये और फिर विवाद में पड़ने वाली बात आएगी ही  नहीं।

रविवार, 27 दिसंबर 2020

सफलतम प्रयास - Motivational Story

 हर व्यक्ति अपने जीवन में सफल होना चाहता है जिसके लिए निरंतर प्रयास करते रहता है । लेकिन हर सफलतम प्रयास तक पहुचने से पहले विभिन्न असफलताओं से गुजरना पड़ता है जिसके लिए निरंतर संघर्ष करते हुए आगे बढ़ना पड़ता है । आइए एक छोटी सी कहानी प्रथम प्रयास के माध्यम से समझते हैं। 

सफलतम प्रयास - Motivational Story


एक बार की बात है। एक प्रतापी राजा के राज्य में एक विदेशी मेहमान राजा के दरबार में पंहुचा और उसने राजा को उपहार स्वरूप सुन्दर पत्थर प्रदान किया । 

बड़ा एवं सुन्दर पत्थर राजा को बेहद पसंद आया और उसे देश बहुद ख़ुशी हुए। राजा ने उस पत्थर से शंकर भगवान की मूर्ति निर्माण कर अपने राज्य के मंदिर में स्थापित करने का फैसला लिया। 

मूर्ति निर्माण हेतु महामंत्री को बुलाया गया। राजा ने महामंत्री को पत्थर दिखाते हुए बोला " यह पत्थर बेहद मूल्यवान एवं विशेष प्रकार की है। इससे बहुत ही मनोरम मूर्ति भगवान शंकर की बनवानी है।" 

महामंत्री ने राज्य के सर्वश्रेष्ठ मूर्तिकार के पास वह पत्थर ले गया और उससे बोला "महाराज ने निर्णय किया है कि इस पत्थर से भगवान शंकर की मनोरम मुर्तिया बनाना है, जिसके के लिए बनाने वाले को 100 स्वर्ण मुद्राये इनाम स्वरूप दिया जायेगा। इसे 10 दिनों के अन्दर भगवान शंकर की प्रतिमा बनाकर राजा के दरबार में पंहुचा देना।" 

100 स्वर्ण मुद्राओं की बात सुनकर मूर्तिकार बहुत खुश हुआ। और महामंत्री से शीघ्र बनाकर पंहुचा देने की बात कही। महामंत्री के जाने के उपरांत मूर्तिकार ने अपने औजार निकाल कर मूर्ति निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। 

सबसे पहले हथौड़ा उठाया और पत्थर तोड़ने का प्रयास करने लगा। मूर्तिकार के कर हथौड़े से वार करने के बावजूद पत्थर नहीं टुटा। 

50 बार प्रयास करने के बावजूद जब पत्थर नहीं टुटा तो उसने सोचने लगा आखिर यह पत्थर टूट क्यों नहीं रहा है। चलो एक बार तरीका बदल कर प्रयास करते है। अंतिम बार प्रयास करने के उद्देश्य से हथौड़ा उठाया, किन्तु यह सोच कर हथौड़े से वार करने के पूर्व ही उसने हाथ खीच लिया कि जब 50 बार वार करने से पत्थर नहीं टुटा, तो अब क्या टूटेगा। चलो इसे महामंत्री को वापस कर देते है। 

मूर्तिकार पत्थर लेकर वापस करने महामंत्री के पास पंहुचा और उन्हें दे दिया। मूर्तिकार ने बोला " इस पत्थर को तोड़ना मुमकिन नहीं । इसलिए इस पत्थर से भगवान शंकर की मूर्ति नहीं बन सकता है।" 

चुकि महामंत्री को राजा का आदेश हर हाल में पूर्ण कराना था। इसलिए उनसे राज्य के एक साधारण मूर्तिकार को ये कार्य सौपा। इस साधारण मूर्तिकार ने महामंत्री के सामने ही हथौड़े से वार किया और वह पत्थर एक ही बार में टूट गया। 

पहले ही प्रयास में पत्थर टूटता देख महामंत्री यह सोचने लगा काश पहले मूर्तिकार ने एक अंतिम प्रयास किया होता हो वह सफल हो जाता और उसे 100 स्वर्ण मुद्राये मिल जाती। 

पत्थर टूटने के बाद साधारण मूर्तिकार ने भगवान शंकर की मूर्ति बनाने में लग गया।

निकर्ष: दोस्तों, हम अपने जीवन के सफलतम प्रयास करने के उदेश्य से ही कोई कार्य करना शुरू करते है या बोले तो अपने मंजिल को पाना चाहते है। लेकिन हमारे जीवन में विभिन्न परिस्थितियां आते रहती है। कई बार हम अपने मंजिल के करीब पहुच कर किसी समस्या के सामने आने पर उसका समाधान करने के बावजूद हम प्रयास करना छोड़ देते है। बार-बार प्रयास करने पर हमारा आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हम एक और प्रयास किये बिना ही हार मान लेते है। इसलिए बार-बार असफल होने के बावजूद भी तब तक प्रयास करना नहीं छोड़ना चाहिए, जब तक की सफलता मिल न जाये। क्या पता, जिस प्रयास को करने से पहले अपने हाथ खीच लेते है, वही अंतिम एवं सफलतम प्रयास हो। 

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बुधवार, 25 नवंबर 2020

एफ एल पी की शुरुआत किसने , कब और कैसे किया ? - FLP Profile

एफ एल पी (फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स ) की शुरुआत किसने , कब और कैसे किया ?

एफ एल पी की कहानी की शुरुआत एक आदमी व उसके महत्वकांक्षी सोच से शुरू होती है। वह व्यक्ति मिस्टर रेक्स मॉन ऐसे बिजनेस आइडिया की खोज में थे, जो उनके जीवन के दो उद्देश्य एक साथ पूरा करें पहला बेहतर स्वास्थ्य और दूसरा आर्थिक आजादी। संयुक्त राज्य अमेरिका के एरिजोना से 1978 में वह पा लिया जो चाहते थे और 43 लोगों को आमंत्रित किया कि वे टीम एरीजोना में पहली बार एफ.एल.पी. की बैठक में भाग ले। इस इकलौती घटना से एक यात्रा की शुरुआत हुई जो अकल्पनीय व्यवसायिक सफलता की ओर चल पड़ी।

flp profile in hindi

एक ऐसी सोच जो पिछले 42 सालों से भी अधिक समय से स्वास्थ्य वह सुंदरता के लिए प्रकृति के स्रोतों का पता लगाने और इन्हें विश्व के लोगों के साथ बांटने में फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट ने स्वयं को समर्पित कर रखा है। इस सोच के साथ 1978 में स्थापित एफ एल पी ने प्रकृति के बेहतरीन स्रोतों को स्वास्थ्य के लिए कैसे काम में लाया जाए इस ज्ञान के नए युग का सूत्रपात किया। एफ एल पी एलोवेरा पेय पदार्थ, स्किन केयर उत्पाद और कॉस्मेटिक की श्रृंखला सहित पूरे शरीर के लिए उल्लेखनीय गुणधर्म ले आई है। इसके साथ ही हमारी पोषक और बीहाइव(मधुमक्खी के छाता) के उत्पादों की पूरी श्रृंखला और बेहतर स्वास्थ्य व सुंदरता पाने के लिए एक संपूर्ण प्रणाली है। आज लगभग दुनिया के एलोवेरा उत्पाद के बिक्री का 70% और मधु उत्पाद के बिक्री का 80% सिर्फ एफ एल पी उत्पाद का बिक्री होता है। 


पिछले 42 सालों में एफ एल पी की शुरुआत एक व्यक्ति की सोच से शुरू हुई, जो एक आदमी के सपने से करोड़ों के स्वप्न में बदल गई। एफ एल पी उत्पादों की शक्ति व बिजनेस प्लान की शाब्दिक अर्थ यह है कि कोई भी अपने जीवन की गुणवत्ता पूर्ण कर सकता है। कुछ लोगो ने बेहतर स्वास्थ्य उत्पादों की खोज में ग्राहक के रूप में शुरूआत किया और फिर संतुष्ट ग्राहक से फॉरएवर बिजनेस ओनर बनकर एक बेहतरीन बिजनेस करना शुरू किया। कई लोगों ने तुरंत व्यवसाय की शक्ति देखी और एक सफल संगठन के निर्माण में जुट गए। इससे जुड़ने का जो भी कारण रहा हो नतीजा वही निकला उनकी सफलता बढ़ती गई और उन्होंने दूसरों की स्वास्थ्य व धन लाभ पाने में मदद किया। आज 42 सालों बाद एफ एल पी पूरे विश्व के 158 देशों से ज्यादा देशों में 10 मिलियन से अधिक फॉरएवर बिजनेस ओनर है। 


फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स इंटरनेशनल के सीईओ तथा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के फाउंडर चेयरमैन मिस्टर रेक्स मॉन फॉरएवर बिजनेस को दो कमरों के दफ्तर से आरंभ किया था वह बढ़ते हुए एक छोटे से अंकुर से पूरा बट वृक्ष बन गया है। आज 158 देशों में इसकी कई शाखाएं हैं और इसकी रिटेल बिजनेस 3 अरब डॉलर से भी आगे बढ़ गई है। 

एफ एल पी के उत्पादों की खासीयत क्या है ?

आज देखा जाए तो एफ एल पी व इसके एफिलिएट्स का अपना एलोवेरा वृक्षारोपण है और इसके उगाने की हर प्रक्रिया की परिचर्या विशेषज्ञों व देखभाल करने वालों द्वारा की जाती है। अंकुर से लेकर इसके परिपक्व होने तक पूरी सावधानी से इसकी देखभाल कर हाथों से कटाई की जाती है। इसके उगने से निर्माण करने तथा उत्पादन वितरण तक की पूरी प्रक्रिया एफ एल पी द्वारा ही की जाती है, इसे कंपनी लगातार ऊपर की ओर बढ़ती जा रही है। यानि कपनी खेत से लेकर पेट तक स्वयं कार्य करती जिससे सप्लाई या उत्पादन के लिए किसी और पर निर्भर नहीं होना पड़ता है। 

एफ एल पी द्वारा सिर्फ एलोवेरा के सबसे सर्वश्रेष्ठ प्रजाति एलो बरबडेंसिस मिलर का ही उपयोग करता है जो इकलौता खाने योग्य एलोवेरा की उपलब्ध किस्मो में सर्वाधिक पोषण शक्ति से भरपूर है।  एफ एल पी का अपना एलोवेरा वृक्षारोपण टैक्सास, कैरेबियन के डोमिनिकन रिपब्लिक, मैक्सिको में 6500 एकड़ में फैला हुआ है। यह तीनों विश्व के सबसे सूखे व गर्म क्षेत्र है और इसीलिए एलोवेरा की खेती के लिए अनुकूल माना जाता है। जबकि बीहाइव से उत्पादन के लिए स्पेन के उची पहाड़ी पर लगभग 100x100 मील में मधुमक्खी पालन किया जाता है।


एलो बरबडेंसिस मिलर किस्म में एलो पत्तों में ही जेल होती है, जिसमें पोषक मूल्य होते हैं और जो एफ एल पी द्वारा निर्माण प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाते हैं। एफ एल पी की 100% स्टेबिलाईज्ड एलोवेरा जेल विश्व में उपलब्ध सबसे बढ़िया है। क्योंकि इसकी खेती से लेकर कर खाने तक शोध व विकास पैकिंग व सीपिंग और वितरण सब एफ एल पी के द्वारा नियंत्रण में रखकर किया जाता है इससे इसके पोषक तत्व बने रहते हैं व सर्वोच्च मानक गुणवत्ता बनी रहती है। क्योंकि एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसके पत्तों में 75 पोषक तत्व, 12 विटामिन्स, 18 अमीनो एसिड्स, 20 मिनिरल्स तथा 200 अन्य घटक मौजूद है। सदियों से एलोवेरा अलग-अलग संस्कृतियों द्वारा उपयोग में लाई जाती रही है जैसे प्राचीन ग्रीक, रोमन, बेबिलोनियन, भारतीय व चीनी सभी एलोवेरा को चिकित्सीय वह चमत्कारी पौधे के रूप में उपयोग में लाते रहे है।


एफ एल पी की शुरुआत भारत में कब और कैसे हुई?

फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट्स के बेहतरीन उत्पादों के साथ 22 वर्षो तक विभिन्न देशों में उपस्थिति के उपरांत 2000 में भारत में पदार्पण हुआ। भारत में लेकर आने श्रेय एफ एल पी इंडिया के पहले CSM अमरजीत उभी को जाता है। उन्होंने सबसे पहले मुंबई में एक ऑफिस से शुरुआत किया जो धीरे-धीरे इसके उत्पाद के गुणवता और बेहतरीन व्यवसायिक अवसर के लोग जुड़ते गये। 

आज एफ एल पी इंडिया ने भारत के विभिन्न राज्यों में 19 कार्यालयों के साथ लगभग 20 लाख से अधिक फॉरएवर बिज़नेस ओनर देश के करोड़ो लोगो तक एफ एल पी के उत्पाद को पंहुचा रहे है। भारत के हेड ऑफिस मुंबई है, जिसे कंपनी द्वारा मई 2009 ख़रीदा गया था। एफ एल पी का भारत में लगभग 500 करोड़ का टर्नओवर है और विश्व में एफ एल पी के उत्पाद को उपयोग करने के मामले में दुसरे स्थान पर है।

एफ एल पी के वर्तमान CSM हरीश सिंगला के बेहतरीन कार्य प्रणाली और प्रयास से भारत विश्व में पहले स्थान पहुचने वाला है।   

शनिवार, 16 नवंबर 2019

निक वुजिकिक की सफलता की प्रेरक कहानी

जब कभी हमारी जिंदगी में समस्या या मुश्किलें आती है, तो हम में से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ऐसा मेरे साथ ही क्यों हो रहा है| यही सोच धीरे-धीरे हमारे अंदर घोर निराशा पैदा करके हमारी जिंदगी को एक बोझ बना सकती है। ऐसे में जरूरत है कि हम खुद पर भरोसा रखें और अपनी ताकत के साथ उनका मुकाबला करें और ऐसा तब तक करते रहे जब तक हम उन पर विजय हासिल ना कर ले। आप सोचेंगे कि यह असंभव है, लेकिन विश्वास मानिए “जिंदगी में कुछ भी असंभव नहीं है” । अगर विश्वास ना हो तो यह निक वुजिकिक की प्रेरक कहानी पढ़िए:- 


4 दिसंबर 1982 को ऑस्ट्रेलिया में एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम निक वुजिकिक था। निक वुजिकिक अन्य बच्चों की तरह स्वस्थ थे, लेकिन उनमें एक कमी थी – उनको Phocomelia नाम के एक दुर्लभ विकार के साथ पैदा हुए थे, जिसके कारण उनके दोनों हाथ और पैर नहीं थे। डॉक्टर हैरान थे कि निक वुजिकिक के हाथ-पैर क्यों नहीं है? निक वुजिकिक के माता-पिता को यह चिंता सताने लगी थी कि निक वुजिकिक का जीवन कैसा होगा? बचपन के शुरुआती दिन बहुत मुश्किल थे। निक वुजिकिक के जीवन में कई तरह की मुश्किलें आने लगी। उन्हें न केवल अपने स्कूल में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा बल्कि उनकी विकलांगता और अकेलेपन से निराशा के अंधकार में डूब चुके थे।

Motivational Story: Nic Vujicic


वह हमेशा यही सोचते थे और ईश्वर से हमेशा प्रार्थना करते थे कि काश उनको हाथ-पाव मिल जाए| वे अपनी विकलांगता से इतने निराश थे कि 10 वर्ष के उम्र में उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन फिर उनकी मां के द्वारा दिए गए एक लेख को पढ़कर उनका जीवन के प्रति नजरिया पूरी तरह से परिवर्तित हो गया| यह लेख एक समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था, जो एक विकलांग व्यक्ति की अपनी विकलांगता से जंग और उस पर विजय की कहानी थी| उस दिन उन्हें समझ में आ गया कि वे अकेले व्यक्ति नहीं है जो संघर्ष कर रहे हैं।

तू कयामत तक धरने पर बैठ ऐ किस्मत,
हम कोशिश करने से कभी इस्तीफा नहीं देंगे।

निक वुजिकिक धीरे-धीरे यह समझ चुके थे कि वह चाहे तो अपनी जिंदगी को सामान्य तरीके से जी सकते हैं| निक वुजिकिक धीरे-धीरे पैर की जगह पर निकली हुई अंगुलियों और कुछ उपकरणों की मदद से लिखना और कंप्यूटर पर टाइप करना सीख लिया। 17 वर्ष की उम्र में अपने प्रार्थना समूह में व्याख्यान देना शुरू कर दिया| 21 वर्ष की उम्र में निक वुजिकिक ने एकाउंटिंग और फाइनेंस में ग्रेजुएशन कर लिया और एक प्रेरक वक्ता के रूप में अपना करियर शुरू किया।

आंतरिक सोच की शक्ति - Power of Internal Thought
आसान रास्ते की तलास - The easier way may actually be the tougher

उन्होंने एटीट्यूड इज एटीट्यूड (“Attitude is Attitude”) नाम से अपनी कंपनी बनाई और धीरे-धीरे निक वुजिकिक को दुनिया में एक ऐसे प्रेरक वक्ता के रूप में पहचाना जाने लगा जिनका खुद का जीवन अपने आप में एक चमत्कार है। उन्होंने प्रेरणा और सकारात्मकता का संदेश देने के लिए लाइफ विदाउट लिम्बस (“Life Without Limbs”) नाम से गैर-लाभकारी संगठन भी बनाया है। 33 वर्षीय निक वुजिकिक आज ना सिर्फ एक सफल प्रेरक वक्ता है बल्कि वह सब करते हैं जो एक सामान्य व्यक्ति करता है. जन्म से ही हाथ पैर ना होने के बावजूद वे गोल्फ वह फुटबॉल खेलते हैं, तैरते हैं, स्काईडाइविंग और सर्फिंग भी करते हैं।

यह अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, लेकिन इससे भी ज्यादा प्रभावित करने वाली बात है, उनकी जीवन के प्रति खुशी और शांति की सम्मोहक भावना। आज वे दुनिया को जिंदगी जीने का तरीका सिखा रहे हैं। जहां हम छोटी-छोटी बातों से परेशान और हताश हो जाते हैं वहीं निक वुजिकिक जैसे लोग हर पल यह साबित करते रहते हैं कि असंभव कुछ भी नहीं - प्रयास करने पर सब कुछ आसान हो जाता है।

ये जो लक्ष्य है न तुम्हारा,
इसके लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
हारते तो सभी हैं, पर होंसला रख के
प्रयास बार-बार करना पड़ेगा।

जिंदगी द्वारा दी गई हर चीज को खुले मन से स्वीकार करनी चाहिए, चाहे वे मुश्किलें ही क्यों ना हो| मुश्किलें ही वो सीढियाँ है जिन पर चढ़कर ही हमें जिंदगी में कामयाबी और ख़ुशी मिलेगी| जो हमारे पास है उसके लिए ईश्वर धन्यवाद दे और आगे बढे|

रविवार, 30 दिसंबर 2018

आसमान की सैर - Reach to highest potential

एक समय की बात है एक राजा अपने राज्य के मेले में घूमने गया। मेला बहुत बड़ा था। मेले में खिलौने, मिठाइयां, कपड़े, फर्नीचर इत्यादि के साथ जानवरों व पंक्षियों की भी बिक्री हो रही थी। मेले में घूमने के दौरान राजा की नजर दो बाज की बच्चों पर पड़ी। वे दोनों एक ही पिंजड़े में थे और दोनों आपस मे खेल-कूद रहे थे। राजा को बेहद पसंद आया । राजा ने मंत्री को आदेश दिए कि दोनों बाजो को खरीद लिया जाए।

अगर आप भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आपको भी जोखिम लेना पड़ेगा, तभी आपके सपने पूरे हो सकते हैं। इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि कोई हमारी शाखा काटेगा, तब हम उड़ेंगे। क्योंकि हम मनुष्य है और हमारी क्षमता असीमित है।

राजा उन दोनों बाजो को लेकर अपने महल में आ गया। वहां एक सेवक को बाजो की देखभाल में नियुक्त कर दिया। सेवक सुबह-शाम बाजो के लिए दाना-पानी का इंतजाम कर देता। दोनो धीरे-धीरे बड़े होने लगे और उड़ाने भरने लगे। कुछ दिन बाद राजा उन बाजो का हाल जानने पहुंचे।
सेवक ने बताया कि एक बाज तो बहुत ऊंचाई तक उड़ता है, लेकिन दूसरा पेड़ की एक शाखा पर ही बैठा रहता है। ये जानकर राजा को बहुत दुख हुआ कि दूसरा बाज उड़ क्यों नहीं रहा है।


राजा ने तुरंत अपने मंत्रियों को बुलवाया, लेकिन कोई भी ये नहीं समझ पा रहा था कि दूसरे बाज को क्या हुआ है।
राजा ने पूरे राज्य में घोषणा करवाने कि आदेश दिये कि जो भी व्यक्ति इस बाज को उड़ाएगा, उसे इनाम स्वरूप स्वर्ण मुद्राएं दी जाएगी।

पूरे राज्य में ये बात फैल गयी। राज्य के सभी कोने से एक से बढ़कर एक पक्षियों के जानकार आये। सभी ने अपनी-अपनी दिमाग लगाये। लेकिन किसी से भी वो बाज नही उड़ पाया। उसी तरह से एक निश्चित ऊँचाई पर पहुंच कर पेड़ के शाखा पर बैठ जाता। 

तभी एक गरीब किसान ने कहा कि मैं बाज को उड़ा सकता हूँ। किसान को बाज के पास ले जाया गया। किसान पक्षियों का जानकार था, उसने बाज के आसपास का क्षेत्र देखा और जिस पेड़ की शाखा पर वह बैठा रहता था, वह शाखा ही काट दी।
इसके बाद दूसरा बाज भी आसमान में बहुत ऊंचाई तक उड़ने लगा। किसान ने राजा को बताया कि ये बाज इस शाखा के मोह में फंसा हुआ था, उड़ने की जोखिम लेने से डरता था, जब ये शाखा ही काट दी गई तो उसके पास उड़ने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था। इस कारण वह अब ऊंचाई तक उड़ने लगा है। ये देखकर राजा प्रसन्न हो गया और उसने किसान को स्वर्ण मुद्राओं से सम्मानित किया।

सीख : इस कहानी का मूल संदेश ये है कि जो लोग जोखिम लेने से डरते हैं, अपने कंफर्ट जोन से बाहर नहीं आना चाहते हैं, वे ऊंचाई तक उड़ नहीं सकते यानी अपने क्षेत्र में शिखर तक पहुंच नहीं पाते हैं। अगर आप भी कुछ बड़ा करना चाहते हैं तो आपको भी जोखिम लेना पड़ेगा, तभी आपके सपने पूरे हो सकते हैं। इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि कोई हमारी शाखा काटेगा, तब हम उड़ेंगे। क्योंकि हम मनुष्य है और हमारी क्षमता असीमित है। बस जरूरत है, अपनी क्षमताओं को ऊंचा करने की।

मंगलवार, 6 नवंबर 2018

आंतरिक सोच की शक्ति - Power of Internal Thought


एक व्यक्ति अपने पुरे परिवार के साथ शहर से बहुत दूर एक छोटे गाँव में रहता था. उसके घर में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं थी. सभी परिवार के सदस्य खुशी से रहते थे. लेकिन उसके दिमाग में हमेशा यही बात सोचते रहता था कि काश हमलोग भी शहरों में रहते तो वहां सभी सुख सुविधाए उपलब्ध है. उसे लगता था कि शहर की जिन्दगी अच्छी है. यानि की शहर की चकाचौंध उसके दिमाग में घूमते रहता था . कभी उसने अपने गाँव के रहन- सहन, वातावरण, शुद्धता तथा ताजगी के सकरात्मक नजरिये से नहीं देखता था.

एक दिन की बात है, उसके घर शहर में रहने वाला एक मित्र आया. वह जमीन खरीद – बिक्री का काम करता था. उसे देखते ही उसके दिमाग में फिर शहर में रहने की बात याद आयी, तो वो अपने दोस्त से अपने बात बतायी कि “दोस्त , मै भी शहर में रहना चाहता हूँ. इस गाँव में रहना मुझे पसंद नहीं है.” दोस्त ने कहा - “ ठीक है तुम मेरे साथ रह सकते हो”.
व्यक्ति ने समझाते हुए कहा कि “ मै चाहता हूँ कि अपने गाँव का घर – जमीन बेच दू तथा शहर में घर लेकर वही रहने लगु.” उसके दोस्त ने घर को देखा और कहा – “तुम्हारा घर इतना सुन्दर है. फिर तुम इसे क्यों बेचना चाहते हो. अगर तुम्हे पैसे की जरूरत हो तो हमसे ले लो. या कुछ दिन शहर में रहना चाहते हो तो हमारे पास रह कर देख लो कि शहर में रहना का क्या फायदा या नुकसान है”.
व्यक्ति ने पुनः समझाते हुए कहा कि “मेरा घर शहर से बहुत दूर है. यहाँ की सड़के शहर की तरह पक्की नहीं है. यहाँ शहर जैसे बड़े-बड़े मॉल व होटले नहीं है. और भी बहुत-सी ऐसी चीजे जो शहर में है लेकिन हमारे गाँव में नहीं है. यहाँ बरसात में भी बहुत किचकिच होता है”. उसके दोस्त ने कहा – “ठीक है, तूने शहर जाने का सोच ही लिया है. तो मै जल्दी ही तुम्हारे इस घर को बिकवा दूंगा.” दोस्त ने उसके घर तथा आसपास के कुछ तस्वीर अपने मोबाइल खीच लिया और चल दिया.
व्यक्ति ने अगले ही दिन अख़बार में एक घर का विज्ञापन देखा. विज्ञापन में लिखा था-“ शहर की भीड़-भाड से दूर , हरियाली से भरा हुआ, स्वच्छ वातावरण , ताजी हवा युक्त एक सुन्दर घर में बसाये अपने सपनो का घर. घर खरीदने के लिए निचे दिए नंबर पर वहाट्सअप करे या दिये गए वेबसाइट पर लॉग इन करे. जब उसने व्हाट्सअप किया तो रिप्लाई में उसके घर का मनोहक तस्वीर आया, जिसे देखकर वो हैरान रह गया. क्योकि ये विज्ञापन उसी के घर का था. लेकिन वो कभी इस नजरिये से अपने घर को देखा ही नहीं था. यह जानकर वह खुशी से झूम उठा. उसने अपन दोस्त को फोन लगाया और कहा – मैं तो पहले से ही अपने पसंद की घर में रहा रहा हूँ . इसलिए तुम मेरा घर किसी को मत बेचना. यही है मेरे सपनो का गाँव और यही है मेरे सपनो का घर.
दोस्तों, इस Motivational Story से हमें यह सिख मिलता है कि ज्यादातर लोगो को अपने जीवन से शिकायत होती है. वे सोचते है कि उनके जीवन दुखो से भरा है . ऐसे लोगो को दुसरे लोगो की जिंदगी ही बहुत ही अच्छी लगती है. हमारे जीवन में भी बहुत ऐसी सकरात्मक व विशेष पहलू है, जिसे हम कभी सकारात्मक रूप से सोचते नहीं है. आप सभी अपने जीवन के सकरात्मक पहलू पर विचार करे तथा उसे और बेहतर बनाने की प्रयास करना चाहिए.
दोस्तों, ये कहानी कैसी लगी कमेंट कर जरुर बताये. धन्यवाद .   

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

Butterfly और Cocoon - Power of Struggle


एक बार Biology के क्लास में शिक्षक द्वारा Butterfly और Cocoon के बारे में  प्रैक्टिकल दिखाया जा रहा था.
Butterfly and Cocoon story in hindi

शिक्षक, “ध्यान से देखो यह बटरफ्लाई कोकून से निकलने के लिए कितना संघर्ष करेगा. मै बाहर से आ रहा हूँ, लेकिन कोई भी बटरफ्लाई को कोकून से बाहर निकालने का प्रयास नहीं करेगा.”
इतना कह कर शिक्षक क्लास से बाहर निकल गये. सभी छात्र उस बटरफ्लाई को कोकून से बाहर निकले की प्रक्रिया को देख रहे थे. बहुत संघर्ष करने के बाद भी बटरफ्लाई कोकून से बाहर नहीं निकला तो एक छात्र को उस पर दया आ गयी और वह कोकून को थोड़ा तोड़ दिया. छात्र के द्वारा कोकून को तोड़ते ही बटरफ्लाई आसानी से बाहर आ गया. लेकिन बाहर आने के बाद बटरफ्लाई उड़ नहीं पा रहा था. और कुछ ही समय में मर गया. तभी शिक्षक क्लास में आये तो छात्रों ने सारी बाते बतायी.
शिक्षक, ”मैंने पहले ही बताया था कि कोई भी बाहर निकलने में मदद नहीं करेगा. चुकि तुम्हारे थोड़े सहयोग के कारण ही बटरफ्लाई के पंख में मजबूती नहीं आ सका, जिसके कारण वो पंखो द्वारा उड़ नहीं सका व मर गया.
दोस्तों, जब हम अपने दोस्त, रिश्तेदार, बच्चे तथा व्यवसाय सहयोगी को संघर्ष करते देखते है तो हमें भी उन पर दया आ जाती है. चुकि हम उनसे इतना प्रेम करते है करते है कि उसे संघर्ष करने ही नहीं देते. जिससे कि उनमे मजबूती के साथ विपरीत परिस्थितियों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाते है और वे असफल हो जाते है.
दोस्तों, यदि हमें किसी भी क्षेत्र में सफलता चाहिए तो शुरुआत में बहुत कुछ सिखने, समझने तथा मेहनत करने पर ध्यान देना चाहिए. हमें असफलता मिले तो उससे भी सिखते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए. कहा जाता है कि “संघर्ष ही जीवन है”, फिर संघर्ष करने से डरना क्या.
यदि हम भी संघर्ष नहीं करेंगे तो सफलता की उच्ची उडान भी उड़ नहीं सकते है.
हम होंगे कामयाब एक दिन.

शनिवार, 11 अगस्त 2018

आसान रास्ते की तलास - The easier way may actually be the tougher

आसान रास्ते 

एक बार एक  गाने वाली चिड़िया जंगल में गाना गा रही थी. तभी, एक किसान उसके  पास से कीड़ो से भरा एक थैला ले कर  गुजरा. 
चिड़िया ने उसे रोक कर पूछा, "तुम्हारे थैला  में क्या है, और तुम कहाँ जा रहे हो?" 
किसान ने जवाब दिया, "इस थैला में कीड़े  है और वह बाजार में उन कीड़ो को बेचने जा रहा है तथा उन्हें बेच  कर पंख खरीदना है." 
चिड़िया ने कहा, "पंख तो मेरे पास भी है. मै अपना एक पंख तोड़ कर तुम्हे  दे दूंगी, और तुम मुझे कीड़े दे देना, जिससे मुझे कीड़े नहीं तलाशने पड़ेंगे."
किसान ने कहा," ठीक है , हमें तो पंख चाहिए और हमें भी बाजार नहीं जाना पड़ेगा."
किसान ने चिड़िया को कीड़े दे दिए, और चिड़िया ने बदले में उसे अपना एक पंख तोड़ कर दे दिया. उसके बाद रोज यही सिलसिला चलता रहा,  और एक ऐसा दिन भी आया, तब चिड़िया के पास देने के  लिए कोई पंख ही नहीं बचा था. वह भद्दी दिखने लगी, और उसने गाना छोड़ दिया .

चिड़िया ने कहा,"आज मेरे पास एक भी पंख नहीं बचे है जिसे मै तुझे दे सकू लेकिन हमें भूख लगी है."
किसान ने कहा," ठीक है लेकिन मैं तो बिना पंख लिये कीड़े नहीं दे सकता."
चिड़िया ने गिडगिडायी,"यदि कीड़े हमें नहीं दिये तो मै भूख से तड़प कर मर जाउंगी."
किसान ," मै तुम्हारी बातो को समझ रहा हुए, लेकिन मेरी अपनी मजबूरी है. हमें बाजार जाकर कीड़े बेचकर पंख लेना होगा."
किसान बाजार के लिए निकल गया. अब चिड़िया उड़ कर कीड़े तलाशने लायक भी नहीं रह गई और भूख से तड़प कर जल्दी ही मर गई .

पढ़े: सकारात्मक सोच की शक्ति

दोस्तों, इस कहानी में चिड़िया को भोजन हासिल करने का आसान तरीका लगा था, लेकिन वही मुश्किल, नुकसानदेह तथा घातक साबित हुआ. यही बात हमारी जिंदगी के लिए भी सच है. कई बार हमें जो रास्ता आसान लगता है, वही बाद में बेहद मुश्किल साबित होता है.

इस कहानी ने एक और सिख दी, यदि हम किसी से भी कुछ पाने का उम्मीद रखते है तो अगला भी हमसे उम्मीद रखेगा.
इसलिए कहा जाता है कि हर बेहतर मुकाम पाने के लिए बेहतर संघर्ष की जरुरत पड़ती है . हमें कभी कोई आसान तथा शॉर्टकट  रास्ते बड़ी मंजिल तक नहीं पंहुचा सकते है.


पढ़े: जो दुनिया को हिलाना चाहता है, सबसे पहले उसे खुद हिलना चाहिए : Improve yourself at right time


ये कहानी आपको कैसी लगी? कमेंट कर बताये ..

रविवार, 17 जून 2018

सकारात्मक सोच की शक्ति

एक राजा था जिसकी केवल एक टाँग और एक आँख थी।उस राज्य में सभी लोग खुशहाल थे क्यूंकि राजा बहुत बुद्धिमान और प्रतापी था।एक बार राजा कुछ सोच रहे थे कि उनको एक  विचार आया कि क्यों खुद की एक तस्वीर बनवायी जाये।फिर क्या था, देश विदेशों से चित्रकारों को बुलवाया गया और एक से एक बड़े चित्रकार राजा के दरबार में आये।राजा ने उन सभी से हाथ जोड़ कर आग्रह किया कि वो उसकी एक बहुत सुन्दर तस्वीर बनायें जो राजमहल में लगायी जाएगी।
Drawing that show Power of Positive Thinking
सारे चित्रकार सोचने लगे कि राजा तो पहले से ही विकलांग है, फिर उसकी तस्वीर को बहुत सुन्दर कैसे बनाया जा सकता है ?ये तो संभव ही नहीं है और अगर तस्वीर सुन्दर नहीं बनी तो राजा गुस्सा होकर दंड देगा।यही सोचकर सारे चित्रकारों ने राजा की तस्वीर बनाने से मना कर दिया।
तभी पीछे से एक चित्रकार ने अपना हाथ खड़ा किया और बोला कि मैं आपकी बहुत सुन्दर तस्वीर बनाऊँगा जो आपको जरूर पसंद आएगी।फिर चित्रकार जल्दी से राजा की आज्ञा लेकर तस्वीर बनाने में जुट गया।काफी देर बाद उसने एक तस्वीर तैयार की जिसे देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और सारे चित्रकारों ने अपने दातों तले उंगली दबा ली।
उस चित्रकार ने एक ऐसी तस्वीर बनायीं जिसमें राजा एक टाँग पूरी तरह से दिखाई दे ऐसे घोड़े पर बैठा है,और एक आँख रानी साहिबा के लटक रहे झुल्फो से ढकी हुई है!राजा ये देखकर बहुत प्रसन्न हुआ कि उस चित्रकार ने राजा की कमजोरियों को छिपाकर कितनी चतुराई से एक सुन्दर तस्वीर बनाई है। राजा ने उसे खूब इनाम एवं धन दौलत दी।
तो क्यों ना हम भी। दूसरों की कमियों को छुपाएँ,उन्हें नजरअंदाज करें और अच्छाइयों पर ध्यान दें।आजकल देखा जाता है कि लोग एक दूसरे की कमियाँ बहुत जल्दी ढूंढ लेते हैं चाहें हममें खुद में कितनी भी बुराइयाँ हों लेकिन हम हमेशा दूसरों की बुराइयों पर ही ध्यान देते हैं कि अमुक आदमी ऐसा है, वो वैसा है। हमें नकारात्मक परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोचना चाहिए और हमारी सकारात्मक सोच हमारी हर समस्यों को हल करती है .

ये भी पढ़े : हीरे की खोज

क्योकि कोई भी व्यक्ति 100% सकारात्मक सोच वाला नहीं हो सकता है . आज जो भी लोग सफल हुए उनमें भी कभी न कभी नकारात्मक सोच आयी लेकिन  वे अपने उपर नकारात्मकता को हावी नहीं होने दिया और एक दिन सफलता का परचम लहरया है .

अंत: ये कहना सही होगा कि हमें सफल होने के लिए खुद में और दुसरे में सकारात्मक पहलू को फोकस करना जरुरी का विषय होता है. तो आयी आज से शुरुआत करते है अपने और दुसरे में सकारात्मक बिंदुओं को उजागर करने की .

ऐसे आपको ये कहानी कैसी लगी ? ये इसे हमें अपने जीवन में अपनानी चाहिए ?
अपना जबाव कमेंट कर बताये .


रविवार, 10 जून 2018

फॉरएवर व्यापार ही क्यों ?

फॉरएवर व्यापार करने के निम्न कारण हो सकते हैं -
गुणवत्तापुर्ण उत्पाद 
दुनिया की सबसे बेहतर उत्पाद बनाने वाली कंपनी है, जो मानव शरीर को निरोग बनाये रखने में बहुत लाभदायक है . चुकी यह कम्पनी खेत से लेकर पेट  तक खुद  काम करती है जिसके कारण किसी  भी स्तर पर गुणवता से समझौता नहीं होता है. फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट ही क्यों?
मुफ्त जोइनिंग(Joining) से जीवनकाल तक सदयस्ता 
इसकी सदस्यता लेने के लिए किसी भी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है और ना ही किसी तरह का वार्षिक व रेनुअल शुल्क लिया जाता है. अभी सदस्यता प्राप्त करे.
पास अप(Pass Up) नहीं 
MLM इंडस्ट्री में दुनिया की एकलौती कंपनी है जो पासअप नहीं कराती है यानि की यदि आपका downline आपसे ज्यादा बिज़नेस करता है तो वो आगे बढेगा तो आपको भी साथ-साथ आगे बढ़ाते जायेगा .
पदानवति (Demotion) नहीं 
यहाँ पर किसी भी तरह का डिमोशन का डर नहीं होता है. यानि की जो पद एक बार मिल गई तो अब आप उससे नीचे नहीं जायेंगे. यदि आप कुछ दिनों के लिए व्यवसाय कम या न करे फिर भी किसी तरह का डिमोशन नहीं होता है.
कोई नवीकरण शुल्क (Renewal Charge) नहीं 
इस व्यापार में किसी भी तरह का नवीकरण शुल्क नहीं देना पड़ता है. यानि की यहाँ नवीकरण कराने की जरुरत नहीं होती है .

कोई वार्षिक शुल्क (Annual Charge) नहीं 
यहाँ पर किसी भी तरह का वार्षिक शुल्क नहीं लिया जाता है .
100% सफेद (White Money) आय 
यहाँ हम 100% सफेद आय कमाते है. हमारी आय से TDS काट कर कंपनी हमारे अकाउंट में पैसा डालती है . जो कि हर महीने के 15 तारीख या पहले पेआउट करती है. लेकिन 15 के बाद नहीं होता है.
दुनिया के सबसे बेहतर एलोवेरा और मधुमक्खी का छतो (Bee Hive) का उत्पादक 
यह कंपनी आज दुनिया के एलोवेरा उत्पाद में 85% सिर्फ फॉरएवर एलोवेरा जेल बिकता है जबकि पुरे दुनिया के  80% सिर्फ फॉरएवर मधु उत्पाद बेचता है.
1978 से शुरू होकर 158  से अधिक देशो में व्यवसाय 
आज यह कंपनी ग्लोबली उपस्तिथि दर्ज कर चुकी है . जो आज दुनिया के 160+ देशो में सफलतापूर्वक व्यवसाय कर रही है.
BRP पर बोनस 
यह दुनिया की एकलौती कंपनी है जो BRP पर बोनस देती है. 
मुफ्त प्रशिक्षण से प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण
कोई भी कार्य बिना सीखे नहीं किया जा सकता है. इसी लाइन को ध्यान रखते हुए ,यहाँ मुफ्त मीटिंग, सेमिनार व ट्रेनिंग दी जाती है.
पारिवारिक व्यायवसाय 
यह एक ऐसा व्यवसाय है जिसे आगे बढ़ाने में आपके पुरे परिवार के लोग सहयोग करते है. यानि यह परिवार प्रत्येक सदस्य इस व्यवसाय को बढाने में मदद करते है .
पुराना काम / नया दाम 
इस व्यवसाय में कोई नया काम नहीं है. यहाँ वही पुरानी काम है जैसे जब हम किसी होटल में खाना खाते है या कोई सिनेमा देखते है  और उसके बारे में अपने दोस्तों को बताते है .
सुरक्षित रोजगार 
यहाँ आप किसी के अधीन कोई नौकरी नहीं करते है . अत: आपको किसी भी तरह नौकरी यानि की रोजगार जाने की डर नहीं होता है.दूसरी बात यह कम्पनी दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य उत्पाद बनाती है , जो अभी और आने वाले समय में मानव शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा.
मेहनत से अधिक परिणाम 
यहाँ हम एक टीम बना कर कार्य करते है जिसके कारण अपने समय को कई गुणा बढ़ा सकते है . और बढ़ा हुआ समय हमारे इनकम को कई गुणा बढ़ा देता है.
World Best Opportunity


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बिना लागत असीमित लाभ 
यह दुनिया की वो बेहतरीन प्लेटफार्म है जहाँ लोगो को कौड़ीपति से करोड़पति बनाया है. या यह भी कहा जाता है कि पैसा लगाकर पैसा कमाने का बहुत रास्ते है लेकिन यदि बिना पैसा लगाये पैसा कमाना चाहते है तो वो MLM या नेटवर्क मार्केटिंग यानि फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट ही है .
आप अपने सी.ई.ओ. हैं 
यहाँ आप अपना बॉस या CEO खुद होते है . आप खुद तय करते है कि हमारे टीम में कितने लोग होंगे और कितना का टर्नओवर करना है. किस तरह के लोगो के साथ कार्य करना है व किस तरह के लोगो के साथ कार्य नहीं करना है.
रॉयल्टी लाभ 
इस प्लेटफ़ॉर्म पर आप एक बार मेहनत कर देते है तो आपकी आने वाली कई पीढीयों को भी इसका लाभ मिलते रहता है. यानि हम यहाँ अपने आने वाले जनरेशन के लिए भी एक आय मुख्य श्रोत छोड़ कर जाते है . 
बिना डिग्री भी चलेगा 
फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट में कार्य करने या सफल होने के के लिए किसी डिग्री की जरुरत नहीं होता है . आप अंगूठा छाप हो या डॉक्टरेट किये हो सबके लिए समान अवसर मिलता है .
उम्र बंधन नहीं 
यहाँ पर कार्य करने हेतु कम से कम आपकी उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए लेकिन अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है . जब तक अपने आप को बेहतर कार्य करने हेतु पाते है कर सकते है . 
आरक्षण नहीं 
आज आरक्षण को लेकर बहुद हो-हल्ला हो रहा है . हमारे यहाँ बहुत ही टैलेंटेड को नौकरी नहीं मिल रही है जबकि उससे कम टैलेंट वाले को आरक्षण का लाभ लेकर नौकरिया मिल जा रही है . लेकिन फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट दुनिया की वो प्लेटफार्म है जहाँ किसी भी तरह का आरक्षण लागु नहीं है . यदि आप टैलेंटेड है तो दुनिया की कोई ताकत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती है.
कुण्डली की गड़बड़ी नहीं 
अक्सर सुनने को मिलता है कि हमारा भाग्य में दोष है या कुंडली में गड़बड़ी है  जिसके कारण हम सफल नहीं हो पा रहे है . लेकिन फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट में आप अकेले कार्य नहीं करते है बल्कि आपके साथ अनेको लोगो की टीम कार्य करती है . यदि आपकी कुंडली में गड़बड़ी है तो आपके सभी लोगो के कुंडली में गड़बड़ी तो नहीं होगी . और आपके टीम के लोगो के कुंडली के कारण आप सफल हो जाते है .
सबको समान अवसर 
यहाँ अमीर हो या गरीब, छोटा हो या बड़ा , काला हो या गोरा या किसी भी जाति / धर्म से हो सबको समान अवसर मिलता है .
दुसरो का भविष्य संवारने व सामाजिक कार्य करने  का सशक्त माध्यम 
यहाँ हम अपने टीम के ऐसे लोगो को साथ लाकर उन्हें मुफ्त में प्रशिक्षण दे कर उनकी भविष्य सवारने का कार्य करते है . यदि किसी को स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या है तो उनको मुफ्त में स्वास्थ्य सम्बन्धी सुझाव देकर उन्हें स्वस्थ्य करने व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य करते है.
उपयोग कीजिए पैसे कमाइये 
यहाँ हमे उपयोग कर पैसा कमाने का मौका मिलता है . यानि हम दुनिया की सबसे बेहतरीन उत्पात का उपयोग कर स्वस्थ्य रहते है तथा उससे पैसा भी कमाते है. यानि की  एक  तीर से दो निशाने .
समय की आजादी 
यहाँ हम एक टीम बनाते है, जिससे हम अपने समय को काई गुणा बढ़ा लेते है . साथ ही यहाँ हमारी प्रत्येक सदस्य अपने आप के लिए बॉस होता है जिसके कारण ये उनका व्यवसाय है . यदि हमें कही घुमने जाने हो तो आराम से जा सकते है. क्योकि टीम हमारी कार्य करते रहती है.  
आर्थिक आजादी 
एक टीम के माध्यम से जैसे ही हमारा समय बढ़ता है तो आमदनी भी बढती है. फिर एक बड़ी टीम के साथ कार्य करते ही एक बड़ी इनकम भी आने लगती है जिससे हमें कुछ खरीदने से पहले सोचने की जरुरत नहीं पड़ती है.
जमीनी सीमाओं की आजादी 
फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट आज 160 से अधिक देशो में सफलतापूर्वक कार्य कर रही है और हमें भी 160 से अधिक देशो में व्यवसाय करने का अवसर प्रदान करती है . 
सम्पर्को की खदान 
यहाँ हम जब टीम बनाते है तो हमारे टीम में विभिन्न तरह के लोग होते है जैसे शिक्षक, डॉक्टर, क्लर्क, बेरोजगार , दुकानदार इत्यादि . इस तरह से हमारी विभिन्न तरह के समुदाय के लोगो से संपर्क बनाने का मौका मिलता है .
महाराजाओ सा सम्मान
फॉरएवर लिविंग प्रोडक्ट प्रत्येक पद को लेने पर उन्हें हजारो लोगो के बीच सम्मानित करती है .

मंगलवार, 8 मई 2018

हीरे की खोज

हाफिज अफ्रीका का एक किसान था। वह अपनी जिंदगी से खुश और संतुष्ट था । हाफिज खुश इसलिए था कि वह संतुष्ट था। वह संतुष्ट इसलिए था क्योंकि वह खुश था। एक दिन एक अकलमंद आदमी उसके पास आया उसने हाफिज को हीरे के महत्व और उनसे जुड़ी ताकत के बारे में बताया उसने हाफिज को हीरे के महत्व और उनसे जुडी ताकत के बारे में बताया । उसने अभी से कहा, "अगर तुम्हारे पास अंगूठे जितना भी बड़ा हीरा हो, तो तुम पूरा शहर खरीद सकते हो, और अगर तुम्हारे पास मुट्ठी जितना बड़ा हीरा हो तो तुम अपने लिए शायद पूरा देश ही खरीद लो।" वह अकलमंद आदमी इतना कह कर चला गया । उस रात हफीज सो नहीं सका । वह असंतुष्ट हो चुका था, इसलिए उसकी खुशी भी खत्म हो चुकी थी।

दूसरे दिन सुबह होते ही हफीज ना अपने खेतों को बेचने और अपने परिवार की देखभाल का इंतजाम किया, और हीरे खोजने के लिए रवाना हो गया। वह हीरो की खोज में पूरे अफ्रीका में भटकता रहा, पर उन्हें पा नहीं सका। उसने उन्हें यूरोप में भी ढूंढा पर वे उसे वहां भी नहीं मिले। स्पेन पहुंचते-पहुंचते वह मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्तर पर पूरी तरह टूट चुका था। वह इतना मायूस हो चुका था कि उसने बार्सिलोना नदी में कूदकर खुदकुशी कर ली।
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इधर जिस आदमी ने हफीज के खेत खरीदे थे, वह एक दिन उन खेतों से होकर बहने वाले नाले में अपने ऊँटो को पानी पिला रहा था । तभी सुबह के वक्त उग रहे सूरज की किरने नाले के दूसरी ओर पर पड़े एक पत्थर पर पड़ी और वह इंद्रधनुष की तरह जगमगा उठा। यह सोच कर कि वह पत्थर उसकी बैठक में अच्छा दिखेगा, उसने उसे उठाकर अपनी बैठक में सजा दिया । उसी दिन दोपहर में हफीज को हीरो के बारे में बताने वाला आदमी खेतो के इस नए मालिक के पास आया। उसने उस जगमगाते हुए पत्थर को देखकर पूछा, "क्या हाफिज लौट आया?" नए मालिक ने जवाब दिया, "नहीं, लेकिन आपने यह सवाल क्यों पूछा?" अकलमंद आदमी ने जवाब दिया, "क्योंकि यह हीरा है। मैं उन्हें देखते ही पहचान जाता हूं।" नए मालिक ने कहा, "नहीं, यह तो महज एक पत्थर है। मैंने इसे नाले के पास से उठाया है। आइए, मैं आपको दिखाता हूं। वहां पर ऐसे बहुत सारे पत्थर पड़े हुए है। उन्होंने वहां से नमूने के तौर पर बहुत सारे पत्थर उठाए, और उन्हें जांचने-परखने के लिए भेज दिया। वे पत्थर हीरे ही रही साबित हुए। उन्होंने पाया कि उस खेत में दूर-दूर तक हीरे दबे हुए थे ।
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इस कहानी हमे बताती है कि यदि हमारी नजरिया सही हो तो हर नकरात्मक परिस्थितियों में भी सकारात्मक ढूंढ सकते हैं। कहा जाता है न कि दूर का ढोल सुहावन लगता है। या फिर दूसरे के खेत की घास हमेशा हरी होती है। ऐसे भी जिन्हें मौके की पहचान नही होती, उन्हें मौके का खटखटाना शोर लगता है। मौका जब आता है, तो लोग उसकी अहमियत नही समझते। और जब मौका जाने लगता है, तो उसके पीछे भागते है।
इसलिए हमे किसी भी मौके को हाथ से जाने से, पहले गंभीरता से बिचार करने के उपरांत ही एक ठोस निर्णय लेना चाहिए।